साहित्य

सपनों का पथ या नशे का गर्त

जीतेन्द्र गिरि गोस्वामी

किसी भी राष्ट्र का भविष्य उसकी युवा शक्ति के कंधों पर टिका होता है और उस युवा शक्ति की सबसे मजबूत नींव उसके विद्यार्थी होते हैं। विद्यार्थी जीवन केवल शिक्षा प्राप्त करने का काल नहीं, बल्कि व्यक्तित्व निर्माण, संस्कारों के विकास और उज्ज्वल भविष्य की आधारशिला रखने का समय होता है। किंतु आज के परिवेश में एक ऐसी चुनौती तेजी से बढ़ रही है, जो विद्यार्थियों के सपनों, स्वास्थ्य और भविष्य को भीतर ही भीतर खोखला कर रही है। यह चुनौती है—तंबाकू और अन्य नशे की बढ़ती प्रवृत्ति।

 

विश्व तंबाकू निषेध दिवस केवल एक औपचारिक आयोजन नहीं, बल्कि समाज को चेताने का अवसर है। तंबाकू चाहे सिगरेट, बीड़ी, गुटखा, खैनी या किसी अन्य रूप में हो, वह शरीर के साथ-साथ मनुष्य की इच्छाशक्ति को भी कमजोर करता है। अनेक विद्यार्थी मित्रों के दबाव, दिखावे की प्रवृत्ति अथवा क्षणिक आकर्षण के कारण इसकी ओर कदम बढ़ा देते हैं। आरंभ में जो केवल उत्सुकता प्रतीत होती है, वही धीरे-धीरे आदत और फिर लत में बदल जाती है।

 

तंबाकू का सबसे बड़ा नुकसान यह है कि यह व्यक्ति के स्वास्थ्य को निरंतर क्षति पहुँचाता रहता है। फेफड़ों, हृदय और मुख से जुड़ी गंभीर बीमारियाँ इसका परिणाम बनती हैं। इससे भी अधिक चिंताजनक तथ्य यह है कि नशा व्यक्ति की सोच, निर्णय क्षमता और आत्मविश्वास को प्रभावित करता है। जो विद्यार्थी अपने सपनों को साकार करने के लिए संघर्ष कर सकता था, वही धीरे-धीरे लक्ष्य से भटकने लगता है।

 

विद्यार्थी जीवन का वास्तविक सौंदर्य पुस्तकों की सुगंध, ज्ञान की खोज, खेलकूद की ऊर्जा और रचनात्मक गतिविधियों में निहित है। जिस आयु में युवाओं को अपने व्यक्तित्व को निखारना चाहिए, उस आयु में यदि वे नशे के जाल में उलझ जाएँ तो उनकी प्रतिभा कुंठित हो जाती है। इसलिए आवश्यक है कि परिवार, विद्यालय और समाज मिलकर बच्चों में जागरूकता का संचार करें तथा उन्हें स्वस्थ जीवनशैली अपनाने के लिए प्रेरित करें।

 

आज आवश्यकता किसी एक व्यक्ति के प्रयास की नहीं, बल्कि सामूहिक संकल्प की है। यदि प्रत्येक विद्यार्थी यह निश्चय कर ले कि वह स्वयं नशे से दूर रहेगा और दूसरों को भी इसके दुष्परिणामों के प्रति जागरूक करेगा, तो एक स्वस्थ, सशक्त और जागरूक भारत का निर्माण संभव है।

 

संकल्प

 

“ज्ञान की रोशनी में जीवन सँवारेंगे,

तंबाकू और नशे से सदा दूरी बनाएँगे।

स्वस्थ तन, निर्मल मन और ऊँचे विचारों के साथ,

अपने सपनों का भारत हम मिलकर बनाएँगे।”

 

~जीतेन्द्र गिरि गोस्वामी  “जीत”

युवा लेखक,कवि एवं साहित्यकार

सक्ती ( छत्तीसगढ़)

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