
जब भी कोई लड़की घर की दहलीज़ लाँघकर अपने सपनों की तरफ पहला कदम बढ़ाती है, तो रास्ते से पहले मोहल्ले की गलियाँ बोलने लगती हैं। दीवारों के भी कान होते हैं और उन कानों से निकली बातें अक्सर ताने बनकर उड़ती हैं।
मोहल्ले वाले क्या बोलते हैं?
1. लड़कियों को इतनी उड़ान ठीक नहीं
सुबह सात बजे स्कूटी स्टार्ट होते ही बगल वाली आंटी बालकनी से टोक देती हैं। उनके हिसाब से लड़की की जगह चूल्हे के पास है, ऑफिस के केबिन में नहीं।
2. ज़माना खराब है, अकेले मत निकला कर
नुक्कड़ के चाचा हर बार यही दोहराते हैं। डर के नाम पर हौसले की पंख कुतरने की कोशिश। जैसे लड़की का घर से निकलना ही सबसे बड़ा खतरा हो।
3. शादी की उम्र निकल जाएगी
रिश्ते वाली बुआ को लड़की की डिग्री से ज्यादा उसकी उम्र की फिक्र होती है। उनके लिए कामयाबी का मतलब सिर्फ डोली उठना है।
4. कपड़े देखो इसके, बिगड़ गई है
जींस पहन ली तो संस्कार पर सवाल। रात को लाइब्रेरी से लौटी तो चरित्र पर बहस। लड़की की पूरी शख्सियत उसके दुपट्टे की लंबाई से नापी जाती है।
5. कमाएगी तो पति से दबेगी नहीं
ये ताना सबसे खतरनाक है। जैसे औरत का आत्मनिर्भर होना रिश्तों के लिए खतरा हो।
और वो लड़की क्या जवाब देती है?
वो अब चुप नहीं रहती। उसकी खामोशी का दौर गया। वो जवाब देती है, आँख खोलने वाले जवाब।
1. उड़ान पर ताने का जवाब:
“आंटी, चिड़िया जब उड़ना बंद कर दे तो घोंसला भी छीन लिया जाता है। मुझे अपने पंखों की कीमत पता है। आप अपनी सोच का पिंजरा खोलिए, ताजी हवा अच्छी लगेगी।”
2. ज़माने के डर का जवाब
“चाचा, ज़माना खराब लोगों से है, घर में बंद रहने से नहीं। अगर मैं निकलूंगी नहीं तो ज़माना बदलेगा कैसे? आप दुआ दीजिए कि मैं इतनी काबिल बनूँ कि कल कोई लड़की मेरी मिसाल दे।”
3. शादी वाले ताने का जवाब
“बुआ, उम्र निकले या न निकले, ज़िंदगी तो अपनी है। शादी मंजिल नहीं है, पड़ाव है। पहले मैं खुद को पूरा कर लूँ, फिर किसी की अर्धांगिनी बनने का सोचूंगी। आपके दौर में विकल्प कम थे, मेरे पास हौसला ज्यादा है।”
4. कपड़ों पर सवाल का जवाब:
“संस्कार कपड़ों में नहीं, किरदार में होते हैं चाची। मेरी जींस आपको दिख रही है, मेरी रात भर की मेहनत नहीं दिखती। नज़र का इलाज कराइए, मेरी नीयत पर शक मत कीजिए।”
5. कमाई वाले तंज का जवाब:
“कमाऊंगी तो अपने पैरों पर खड़ी रहूंगी। बराबरी से रिश्ता निभाना आसान होगा। दबना दबाना आपके ज़माने की बात थी। हम साथ चलने में यकीन रखते हैं।”
आखिरी बात
हर लड़की जब घर से निकलती है तो सिर्फ अपना बैग नहीं उठाती। वो पूरे समाज की सोच को अपने कंधे पर उठा लेती है। मोहल्ले की बातें दीवारें बनाती हैं, और उसका जवाब उन दीवारों में दरवाज़े बना देता है। अगली बार कोई लड़की निकले तो ताना मत देना। हो सके तो हौसला देना। क्योंकि जब एक लड़की आगे बढ़ती है, तो पूरा मोहल्ला तरक्की करता है।पिताजी कहते है हीरा गंदगी में गिर जाए तब भी कीमत कम नहीं होती।सोने पर कभी काट नहीं आता कमल कीचड़ में खिलता है ।
अच्छी जिंदगी और कामयाबी के लिए घर से निकलना पड़ता है और
बुरे रस्ते ही असली मंजिल पहुंचाते है।
बुरा बुरा तब तक बुरा नहीं जब तक इंसान की सोच बड़ी है ।छोटी सोच पांव की मोच जिंदगी में आगे बढ़ने नहीं देती। सकारात्मक सोच दायित्व बढ़ाती है ।
आप जिस बहिन बेटी की बात करते हो क्या पता कल उनमें से आपकी कोई बहिन बेटी हो कल किसी गंदी सोच का शिकार बने तब क्या करोगे
जाग जाओ! इंसानियत के फरिश्तों ।वक्त बदल गया ,पहनावा बदल गया,रहने सहने का ढंग बदला गया जमाना बदल गया, लोग बदल गए, लेकिन सोच का दायरा कब बढ़ा होगा बड़ी बड़ी बाते करने वालों
समाज के शहंशाहों अपनी सोच पर लगाम कस लो वरना।हर दिन इंसानियत कुचली जाएगी। तब क्या करोगे।
मौलिक, स्वरचित
डॉ संजीदा खानम शाहीन




