साहित्य

किताबों से प्रेम

संगीता वर्मा

संगीत रस जीवन सुधा, मन को दे आराम ।

ज्ञान सरीखी पुस्तकों, करती सदा कल्याण ॥

 

सुर ताल जब मिलत हैं, जग होवे उजियार ।

ग्रंथ सुधा जब मिलत है, मिटे अज्ञान अंधार ॥

 

वाणी में जब गीत हो, आत्मा पाए हार ।

पुस्तक जब संग हों तभी, ज्ञान बने संसार ॥

 

संगीत और पुस्तकें, जीवन का आधार ।

इनसे ही मिलती सभी, संवेदना अपार ॥

 

संगीता वर्मा “धारा”, कहती यह उपमान ।

गीत-पुस्तक जीवन में, जैसे अमृत दान ॥

 

स्वरचित एवं यथार्थ

संगीता वर्मा

कानपुर उत्तर प्रदेश

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