
प्रेम पिता का सबसे प्यारा ,
हमको लगता सबसे न्यारा
झूठ मूठ का हम पर चिल्लाते ,
नरमी नहीं कभी भी दिखाते।।
लेकिन हल्की सी,चोट पर भी
तुरंत हमारी,वे मां सी बन जाते
अनुशासन रखते है,वे घर पर
हम सबकी वे सुरक्षा चाहते ।।
खेल खेल में वे हमे सिखाते ,
सारी दुनियाँ का हाल बताते ।
हम भी सुनते हैं ,सारी बाते
बड़े प्यार से हमें वे समझाते।।
कोई भी गलती हो जाएँ,
सही ,गलत का सार बताते ।।
शिक्षा की हो जब भी बारी
वे सदैव गुरूवर कहलाते !
मात पिता के है हम आभारी
जो जीवन जीने की राह दिखाते ।।
पिता हैं भाग्य,जीवन के तरुवर
हम बच्चे उनको शीश नवाते ।।
©®आशी प्रतिभा ( स्वतंत्र लेखिका)
मध्य प्रदेश,ग्वालियर




