साहित्य

भूल गया वो उड़ना,

पंकज एस पाण्डेय

जो कभी आसमां का राजा था,

पिंजरे मैं कैदी बनके कैसा कटा जीवन,

भूल गया वो खुली हबा मेँ उड़ना,

दाना पानी तो मिल जाता,

पर न मिल पाते उसके संगी साथी,

न खुली हबा न आसमां,

मत कैद करो इन परिंदो को,

उड़ने डॉ खुले आसमां मेँ

न ही छीनो इनसे इनकी आज़ादी,

आज़ादी ही इनका जीवन है,,,,

मुक्त करो इनको अपने पिंजरों से

***

✍🏼पंकज एस पाण्डेय,

शिकोहाबाद !”

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