थाम तिरंगा
सर उठाकर
बिना भय
गगन तले
जिये जो शान से
नफ़रती आग
बिन टकराये
भेदभाव के
रहे आजादी संग
बिन सिसके
खाए रोटियां
भूखा पेट
लेता सांस
बिना शर्त के
उगते सूर्य संग
समानता पा
रहे जो नागरिक
रहे बिटिया
बिना डर के
रात दिवस
खुली हवा में
लेती हो सांस
नापती दुनिया
बिना बेड़ियाँ
ले उड़ान
विचारों की शान
बिन पहरे
मायने आजादी के
मान ,सम्मान
अधिकार
बिना व्यवधान के…..
मीना तिवारी
पुणे




