साहित्य

बादल

सरोज शर्मा

भैया   तुमने   देखे   बादल,

गरज – गरजकर हमें डराते,

कौंधी बिजली आसमान में,

डर के मारे  सब छिप जाते ।

 

बच्चों ने  मिल  नाव चलाई,

सुंदर    हवा   चले   पुरवाई ,

झम झमाझम घटा बरसती,

हरति  छटा  घरती पर छाई ।

 

भर गए पोखर ताल तलैया,

डूब  गई  बबलू  की  मड़ैया,

भरे खेत ,बाग ,घर ,आंगन,

बाढ़ से मच गई ताता थैया ।

 

सड़कें भरी,वाहन सब डूबे,

खंबे , पेड़   गिरे   घर   चूबे,

अफरा तफरी हो गई भारी,

डूबे  गाँव  ज्यों  ही पुल टूटे ।

 

सरोज शर्मा

दिल्ली

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