साहित्य

देव भूमि देहरादून

डॉ.प्रभा जैन

बहुत सुन्दर है,देहरादून,

एक-एक,कण-कण में,

शिव-पार्वती है यहाँ,

देव नगरी है देहरादून।

 

पत्तों से छन-छन कर आती,

सुनहरी भोर की रश्मियां,

मन का आँगन खुशबू से महक- महक,

चहक-चहक कर जगमगा जाता।

 

पवन की शीतलता ,

हाथ बढ़ा कर रोक लेती, आने वाले,पथिक का जैसे,

मन से स्वागत कर रही हो।

 

शाम गोधूलि की बेला

हिल-हिल जाता मन का तार,

मानो संगीत में पिरो देती है

जीवन के सब अरमान।

 

पता है, रात को जब

जुगनू की बारात निकलती,

टिम-टिमाकर…टिम- टिमाकर…

छोटी-छोटी कालोनी मन अंतस की

जगमग हो जाती है।

 

दिव्य रौशनी दिखाती है, तारों की बारात,आकाश गंगा,

चाँदनी रात में खिल-खिला कर,

बांहे पसार,पास बुलाती है।

 

और हम छत पर खड़े-खड़े, गुमसुम हो जाते है,मन के मनके,

दिखते है जब प्रकृति के नजारे

खेल दिखाती है…नजर खुली-खुली,

खो जाते है प्रकृति की अठखेलियों में।

 

यूहीं……. यूहीं…..

रात निकल जाती है…..

 

स्वरचित

डॉ.प्रभा जैन “श्री ”

देहरादून

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