
जीव दया सा धर्म नहीं
मानव हित सा कर्म नहीं
द्वेष भाव से दूर हुए
जान सके हैं मर्म वहीं।
सागर से भी गहरी है
बात नहीं ये अपनी है
जग का स्वामी कहता है
सारी धरती अपनी है।
डॉ.उमा रानी दुबे
जयपुर,राजस्थान

जीव दया सा धर्म नहीं
मानव हित सा कर्म नहीं
द्वेष भाव से दूर हुए
जान सके हैं मर्म वहीं।
सागर से भी गहरी है
बात नहीं ये अपनी है
जग का स्वामी कहता है
सारी धरती अपनी है।
डॉ.उमा रानी दुबे
जयपुर,राजस्थान