
पहले आयरलैंड और अब इंग्लैंड के खिलाफ श्रृंखला में मिली एकतरफा हार से टीम इंडिया पर सवाल उठना लाजमी है। क्रिकेट के इस फॉर्मेट में इंडिया दुनिया की सरताज टीम रही हैं। लेकिन आज एक जीत के लिए तरस रही हैं। भारतीय क्रिकेट टीम को इंग्लैंड दौरे पर टी20 सीरीज में बेहद निराशाजनक और शर्मनाक हार का सामना करना पड़ा है। हाल ही में संपन्न हुई 5 मैचों की टी20 इंटरनेशनल सीरीज को इंग्लैंड ने 4-0 से अपने नाम कर लिया (पहला मैच बारिश की भेंट चढ़ गया था)। भारतीय क्रिकेट इतिहास में यह पहली बार हुआ है जब टीम इंडिया किसी द्विपक्षीय टी20 सीरीज में चार मुकाबले हारी है।
विशेष रूप से सीरीज के तीसरे मैच में नॉटिंघम के मैदान पर भारत को टी20 इतिहास की अपनी सबसे बड़ी रनों के लिहाज से (125 रन) हार झेलनी पड़ी, जहां पूरी टीम महज 76 रनों पर सिमट गई। वहीं आखिरी मुकाबले में इंग्लैंड के बल्लेबाजों ने भारतीय गेंदबाजों की धज्जियां उड़ाते हुए 257 रनों का विशाल स्कोर खड़ा किया, जिसके जवाब में श्रेयस अय्यर की कप्तानी वाली भारतीय टीम लक्ष्य से 56 रन दूर रह गई।
आयरलैंड जैसी छोटी टीम के खिलाफ भी इंडिया का प्रदर्शन निराशाजनक रहा दो मैच की सीरीज में एक भी मैच नही जीत पायी,150 रन का छोटा सा टोटल भी हासिल करने में असमर्थ रही। यह दर्शता हैं कि टीम इंडिया अभी किस मुसीबत से गुजर रही हैं। आखिर लगातार दो बार की वर्ल्ड टी-20 चैंपियन व लगभग 1600 दिनों तक टी-20 नंबर एक का ताज अपने पास रखने वाली टीम की यह हालत बनी कैसे जो आज एक मैच जीतने के लिए तरस रही हैं?
जब किसी भी टीम में खिलाडियों का चयन उसके योगता पर न होकर अपने पसंद पर होने लगे तो टीम का यह दुर्दशा पर हैरान होने की जरूरत नहीं है।
भारतीय क्रिकेट टीम कि इस दुर्दशा के लिए कोई एक व्यक्ति जिम्मेवार हैं तो वह गौतम गंभीर हैं। जो इनके द्वारा क्रांतिकारी फैसले लिए जा रहे हैं क्या वे टीम इंडिया के भले के लिए हैं? क्रिकेट का तो यह अघोषित नियम हैं न की अगर हारे तो गलती खिलाडियों की और जीत गए तो कोच साहब सारा क्रेडिड लेने आ जायेंगे। राहुल द्रविड़ की तपस्या और रोहित, विराट के पसीने से जिस चैंपियन टीम की नींव रखी गयी थी। उस सजी सजाई टीम को पुरी तरह बिखेर कर रख दिया गया है गंभीर के द्वारा। संजु समसन जैसे खिलाडियों को आप बाहर कैसे बैठा सकते हैं जिसने आपको हाल ही मे वर्ल्ड चैंपियन बनाया हैं। आप ने चैंपियन टीम के कप्तान को बाहर बैठा दिया, मजाल है जो तिलक वर्मा को किसी मैच में बाहर बैठा दे नहीं उन्हें तो उप कप्तान बनाकर सम्मानित किया जा रहा है। अगर आपका चयन करने का माध्यम आई पी एल का प्रदर्शन हैं तो फिर रजत पटीदार का चयन क्यूँ नहीं ? जिसने दुनिया की सबसे कठिन लीग में लगातार दो बार अपनी टीम को चैंपियन बनाया उसको आप खिलाना नही चाहेंगे। जिस मोहसिन खान,रसिम डर, कार्तिक त्यागी, भुनेश्वर कुमार, कुणाल पांड्या ने पुरे सीजन अच्छा प्रदर्शन किया उसका चयन आप नही करेंगे क्युंकि वह खिलाडी आपको पसंद नहीं है। अभी भी कुछ नहीं बिगड़ा है , कहते हैं न कि जब जागे तब सवेरा। कोच साहब और मुख्य चयनकर्ता आपलोग अपने ईगो को छोड़ कर अपनी गलतियों को स्वीकार करे और भारतीय क्रिकेट टीम को डूबने से बचा लीजिए।
नवनीत कुमार, बिहार



