
आओ सखी चले जगन्नाथ पुरी।
अवंती के राजा इंद्रद्युम्न ने मंदिर बनवाया।
वार्षिक रथ का उत्सव है आया।
तीन प्रमुख देवताओं को सजाया।
भील सवार आदिवासी पूजा करेंगे।
जगन्नाथ जी की छवि देखने को हम भी चलेंगे।
जगन्नाथ जी की छवि में कृष्ण जी का दिल भी रखा है।
चार धाम में से एक धाम जगन्नाथ पुरी का बना है।
श्रद्धालुओं की उमड़ी भीड़,
आओ सखी हम भी चलेंगे।
जगन्नाथ पुरी के दर्शनों से मोक्ष मिलेंगे।
जगन्नाथ जी के रूप में श्री विष्णु जी मिलेंगे।
बैकुंठ धाम जैसी यात्रा हम जगन्नाथ पुरी में ही करेंगे।
आओ सखी चले जगन्नाथ पुरी।
रथ यात्रा में शामिल हम होंगे।
बरसों के तब पाप धुलेंगे।
मन होंगे प्रसन्न
करेंगे हम दर्शन।
चलो सखी चलेंगे जगन्नाथ पुरी।
मधु वशिष्ठ फरीदाबाद हरियाणा




