
देश और दुनिया को झाबुआ मध्य प्रदेश आदिवासी जिले में दस्तक देता डॉ रामशंकर चंचल अपनी 16वीं अमेजन कृति के साथ दस्तक देते हुए सारे देश और दुनिया को चौक दिए हैं जिस आदिवासी जिले में साहित्य की बात करना ही बैमानी लगती हैं वहां जन्म से निवास करते हुए सालों से पूरी रात जागते हुए डॉ चंचल ने आज देश और दुनिया को चौका दिया है कि झाबुआ जैसे पिछड़े अंचल में भी अद्भुत साहित्य है, जहां की धरा में रामायण गीता और कुरान बाईबल जैसे महा ग्रंथ है बस चाहिए साफ़ मन आत्मा से सृजन शील रहकर साधना और तपस्या की कोई भी प्रतिभा किसी शहर जाति धर्म और राजनीति की मोहताज़ नहीं है इन सब बैसाखी का सराहा वो लोग लेते हैं, जिन्हें ख़ुद पर आत्मा विश्वास नहीं जो सृजन शोक से, नाम और प्रसिद्ध के लिए करते हैं उन्हें वो अक्सर इन बैसाखी के सहारे कुछ समय चलते हैं और फिर लुप्त हो जाते है
तुलसीदास, सूरदास, कबीर,मीरा, प्रेमचंद, टैगोर, विवेकानंद आदि आदि किसी सम्मान के मोहताज नहीं थे
सचमुच ईश्वरीय आशीष है आप को मिलेगा जितना साफ़ पावन पवित्र मन आत्मा से सृजन होगी ईश्वर सदा ही साथ होगी यह परम सत्य सदा ही महसूस किया है
कलम निष्पक्षहो, बेबाक हो, साफ़ मन आत्मा से सृजन हो तो कालजयी कृतियों का निर्माण स्वतं
होगा जो सदियों याद किया जायेगा और हजारों हजारों के दिल और दिमाग में दस्तक देता हुआ देश और दुनिया को समाज को सही दिशा मार्ग दर्शन देगा आनेवाले युवा पीढ़ी को प्रेरित करेगा और दुनिया में सुख सुकून देगा
अपने इस अद्भुत कथन के साथ डॉ रामशंकर चंचल ने अपनी ताजा कृति, डॉ रामशंकर चंचल की नई कविताएं से परिचय कराते हुए कहां कि ईश्वर कृपा हुई तो सतत् डॉ रामशंकर चंचल की नई कविताएं भाग एक से भाग चार निकलना चाहता हूं जो आज प्रकाशन इंकलाब पब्लिकेशन बंबई के पास सुरक्षित हैं चारों कृतियों की फाइल बस सब कुछ ईश्वर के हाथ में है जैसा वो चाहेगा वह मुझे आदेश दे
प्रणाम सत् सत् ईश्वरीय शक्ति को रूह को , झाबुआ की पावन पवित्र धरा को




