
मैले हो जाते रिश्ते भी उन्हें प्रेम से धोया करिए।
कभी रिश्तों की जमीन पर प्यार के बीज बोया करिए।।
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हमारे शब्दों का मीठापन रिश्तों को पकड़ कर रखता है।
जैसे मिट्टी का गीलापन जड़ों को जकड़ कर रखता है।।
सुख-दुःख में साथ-साथ आप हंसा और रोया भी करिए।
मैले हो जाते हैं रिश्ते भी उन्हें प्रेम से धोया करिए।।
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कांटों से भी उलझना पड़ता कभी कुछ सुलझाने के लिए।
कभी करके भी दिखाना पड़ता कुछ बतलाने के लिए।।
कभी खुशी को पाने के लिए खुशी को दिया भी करिए।
मैले हो जाते हैं रिश्ते भी उन्हें प्रेम से धोया करिए।।
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अनमोल संबंध दौलत के तराजू पर कभी मत तोलना।
सब कुछ अच्छा ही रहे तो मत तुम झूठ को बोलना।।
बस गलतफहमी में ही विश्वास को मत खोया करिए।
मैले हो जाते हैं रिश्ते भी उन्हें प्रेम से धोया करिए।।
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रचयिता।।एस के कपूर”श्री हंस”
बरेली।।
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