
वो खाट कहां से लाऊं
जिस पर दादी लेटा करती थी,
घुंघट काढ़े तब मां मेरी
हुक्का पहुंचाया करती थी।
वो खाट कहां,,,,,,,,,,,,,,
दरवाजे पर खूंटें से बंधीं
गैया आवाज लगाती थी,
घुंघट काढ़े तब मां मेरी
गौराश उन्हें पहुंचाती थी।
वो खाट कहां,,,,,,,,,,,,,
सांझ ढले पीपल गाछ तले
खेलों में बचपन खो जाता,
घुंघट काढ़े तब मां मेरी
आंचल में छुपा ले आती थी।
वो खाट कहां,,,,,,,,,,,,,,,,
मां डर जाती मेरे बच्चे को
कहीं नजर नहीं तो लग गई है,
घुंघट काढ़े तब मां मेरी
राई-मिर्ची से निहुछा करती थी
वो खाट कहां से,,,,,,,,,,,,,
मुजफ्फरपुर, बिहार




