साहित्य

त्यौहार भारतीय संस्कृति की पहचान

नीतू रवि गर्ग "कमलिनी"

त्यौहार भारतीय संस्कृति की पहचान,
भिन्न-भिन्न त्योहार,भिन्न-भिन्न विधि विधान,
कभी होली, कभी दिवाली, कभी तीज,
परंपराओं के घोतक,खुशियों के प्रतीक।

होली में आती रंगों की बहार,
सावन हरियाली तीज का आगाज,
दशहरा सत्य की विजय का प्रतीक,
दिवाली करती तम का विनाश।

नवरात्रि मां दुर्गा ने नव रूप धरे,
कार्तिक मास सभी तुलसी पूजन करें,
हर त्यौहार का रंगरूप अलग है,
रीति रिवाज मनाने का ढंग अलग है।

रंग बिरंगी त्यौहार का मौसम,
खुशियों से हर्षाता है सबका मन,
मिलजुल कर सब खुशियां मनाते,
मनमुटाव मिटा प्यार से गले लगाते।

सभी मिलजुल कर एक दूजे का सम्मान करें,
भिन्न-भिन्न पकवान से त्योहारों का मान बढे,
ना रहे कोई दुखी,सब और खुशियां छाई रहे,
आओ मिलकर त्योहारों पर ऐसा प्रण करें।

नीतू रवि गर्ग “कमलिनी”
चरथावल मुजफ्फरनगर उत्तरप्रदेश

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