साहित्य

कुंडलियां

आत्म प्रकाश कुमार

टुनटुन सी बीवी मिली बच्चे गोल मटोल।
जब मिल यह पलटन चले धरती जाए डोल।
धरती जाए डोल लगे भूचाल आ गया
वक्त से पहले जैसे काल आ गया।
“कह कुमार” पक गए कान फरियादें सुन सुन
भैंस सरीखी काली मोटी मेरी टुनटुन।

आत्म प्रकाश कुमार गांधीनगर गुजरात भारत

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