
अंतिम सांसें गिनने तक मैं आखरी पन्ने लिख पाई,
शोर मचाया सबने शमशान तक पहुंचाओ भाई।
बस चंद सांसें चल रही ज़िन्दगी खत्म होने वाला,
कुछ ना बचा अब मौन हो गया सब घरवाला।
गम छिपाकर रखा हमने बाहर मुस्कुराती रही,
रच कर लिखी कहानी खुशियाँ लुटाती रही।
दर्द दुःख सब सहन कर भर दी आखिरी पन्ना,
प्यार का पाठ सबको सिखाती है आखिरी पन्ना।
अपने मन की भावनाओं को उकेरा है इसमें,
आशा की भी दीप लिखकर जलाई है इसमें।
जीवन मंत्र व जीत सारी सबको दिलाकर के,
कुछ हंसी ख्वाब की सजाई है आखिरी पन्नों में।
याद में उनकी खोई गुनगुनाती हुई लिखती गई,
हर जख्म भुलकर आखिरी पन्ना सजाती गई।।
**************************************
ममता झा मेधा
डालटेनगंज



