जब हम मंदिर में महंगी मिठाई प्रसाद के रूप में लेकर जाते है या महंगे जूते पहन कर जाते है तब हमारा पूरा ध्यान अपने प्रसाद पर रहता है कि कहीं मेरे प्रसाद का डिब्बा पुजारू जी ने बदल तो नहीं दिया या पुजारी जी पूरा प्रसाद बांटकर खत्म तो नहीं कर देंगे या जूते चोरी न हो जाएं आदि आदि…
यह स्थिति अध्यात्म जगत में सबसे खतरनाक होती है जो हमें प्रभु से दूर कर देती है👏




