साहित्य

कल की गुरुवाणीकी व्याख्य

Mamta Agarwal

जब हम मंदिर में महंगी मिठाई प्रसाद के रूप में लेकर जाते है या महंगे जूते पहन कर जाते है तब हमारा पूरा ध्यान अपने प्रसाद पर रहता है कि कहीं मेरे प्रसाद का डिब्बा पुजारू जी ने बदल तो नहीं दिया या पुजारी जी पूरा प्रसाद बांटकर खत्म तो नहीं कर देंगे या जूते चोरी न हो जाएं आदि आदि…

यह स्थिति अध्यात्म जगत में सबसे खतरनाक होती है जो हमें प्रभु से दूर कर देती है👏

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