साहित्य

सरस्वती वंदना

मंजुला शरण 'मनु '

जयति जय हे माता शारदे ,
दूर अज्ञान हृदय से कर दे ।

तुम ही माता विद्या दायिनी ,
शुभ-मंगल -सर्वदा दायिनी !

वेद-पुस्तक तुम कर धारिणी ,
दिव्य -सुर -संगीत वीणा वादिनी।

हंस — वाहिनी शुभकारिणी ,
पीत-श्वेत वसन की धारिणी ।

करुणा सागर नाम तुम्हारा,
शब्द ब्रह्म तुम से ही सारा ।

ज्ञान-दीप तुम से उजियारा ,
ऊँकार है मंत्र तुम्हारा ।

विद्या– दात्री माँ वागेश्वरी ,
तुमको नमन हे मातेश्वरी ।

तुम बिन कोई राह न सूझे
मूढ़-अज्ञानी कुछ ना बूझे ।

नवल ज्ञान की जोत जगा दो ,
अंध –तिमिर में दीप जला दो ।

विद्या-बुद्धि का दान करो माँ,
वंदन तुम स्वीकार करो माँ !

मंजुला शरण ‘मनु ‘
राँची , झारखण्ड़ ।

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