साहित्य

बसन्त

अकिंचन

हिय जिय मनवा से हो गइल,सब ऋतुअन क अन्त।
नयन पुष्प सबकर खिलल,छाइल ऋतुराज बसन्त।।
छाइल ऋतुराज बसन्त,माघ शुक्ल पंचमी बा आइल।
हर्षोल्लासित मन सबही,बागेश्वरी पूजन हित धाइल।।
परम चेतना क त्रिनेत्री देवी,तूड़त कामदेव क धनवा।
प्रज्ञान- प्रदाता मइया,पावन करत हिय जिय मनवा।।

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