साहित्य

धैर्य

जयचन्द प्रजापति 'जय'

धैर्य एक जड़ी बूटी की तरह है
जो इसका उपयोग करता है

वह सहज होकर
दुनिया की हर समस्याओं का

बड़ी शालीनता से
एक महान योद्धा की तरह

बड़ी आसानी से जीत लेता है
जीत लेता है एक बड़ी जंग

धैर्य युध्द की कला की तरह है
बड़े आसानी से

परास्त कर देता है
बडे़- बड़े योध्दाओं को


जयचन्द प्रजापति ‘जय’
जैतापुर हंडिया प्रयागराज

यह कविता धैर्य की महिमा का सुंदर चित्रण करती है, जहाँ कवि जयचन्द प्रजापति ‘जय’ धैर्य को एक जड़ी-बूटी और युद्ध-कला के समान बताते हैं।

भावार्थ:

धैर्य एक ऐसी जड़ी-बूटी है जो उसके उपयोगकर्ता को सहज भाव से दुनिया की हर समस्या पर विजय दिला देती है—जैसे कोई महान योद्धा शालीनता और आसानी से बड़ी जंग जीत लेता है। धैर्य युद्ध की कला के समान है, जो बड़े-बड़े योद्धाओं को भी सहज ही परास्त कर देता है।

कुल मिलाकर, कविता धैर्य को जीवन की हर चुनौती पर विजयी होने वाली अचूक शक्ति के रूप में प्रस्तुत करती है, जो शांति और कुशलता से सफलता प्रदान करती है।

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