साहित्य

आओ खेलें होली

ज्ञान विभूषण डॉ.विनय कुमार श्रीवास्तव

रंग खेलें ले अबीर गुलाल,गुझिया की अनुपम होली।
आएँ खेलें हम सब मिल के,प्रेम से अपनी ये होली।।
डालें रंग अबीर गुलाल लगाएँ,गले मिलें सभी होली।
रंगोत्सव का पर्व हमारे,सनातन संस्कृति की होली।।

पिचकारी में ले लाल हरे पीले,नीले बैंगनी रंग डालें।
अबीर गुलाल सभी खूब उड़ाएँ,बच्चे सब रंग डालें।।
आपसी प्रेम-भाईचारा बढ़ाएँ,एक दूजे पर रंग डालें।
सामाजिक समरसता बढ़ाएँ,दिल हर्षित कर डालें।।

मन को न कोई क्लेश रहे,हृदय में न कोई खोट रहे।
प्रियतम संग खेलें होली,लोक लाज सब ओट रहे।।
मनमीत से होली खेलन की,मन में नहिं कचोट रहे।
भाँग पीस दूध मिला ठंडाई,बना होली में घोंट रहे।।

मथुरा वृन्दावन बरसाने में,खेलें मिल सब हैं होली।
गोप-गोपियाँ ग्वाल-बाल,सखा-सखी मिल होली।।
वृषभान कुमारी खेल रही हैं,प्रिय कृष्ण संग होली।
राधा से रास रचैया बंशी बजैया,खेलें मधुर होली।।

गाँव गली में धूम मचाएँ,मिल गाएँ फाग होलियारे।
ढोल मंजीरे झाँझ बजाएँ,होली गीत में होलियारे।।
रंगपर्व उत्सव का आएँ,अनुपम आनंद उठाएँ सारे।
आएँ हम सब गले मिलें,एक दूजे से प्रेम से प्यारे।।

होली खेलें रघुवीरा सिया संग,होली खेलें रघुवीरा।
लक्ष्मण भरत शत्रुघ्न,राम भक्त बजरंगी बलबीरा।।
अवध में धूम है होली की,रंग डारैं गुलाल के बीरा।
चारों भैया खेलें अयोध्या,बजे ढोल मृदंग मंजीरा।।

कौशल्या कैकेई सुमित्रा,उर्मिल मांडवी श्रुतिकीर्ति।
दशरथ नंदन सब अनुपम,त्याग तपस्या की मूर्ति।।
सारे जगत में मर्यादा पुरुषोत्तम,श्रीराम की कीर्ति।
श्रीहरि विष्णु हैं अवतार,प्रभु राम चरित सुकीर्ति।।

कहें सब आओ खेलें होली,होली आई भई होली।
प्रेम एवं भाईचारा भरा,रंग पर्व मनमोहक होली।।

ज्ञान विभूषण डॉ.विनय कुमार श्रीवास्तव
सेवानिवृत्त वरिष्ठ प्रवक्ता-पी.बी.कालेज,प्रतापगढ़,उ.प्र.

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