साहित्य

ग़ज़ल

वाई.वेद प्रकाश

जीने को जीते रहते हैं अपने भीतर एक जिया।
पाने को पा ही जाते हैं अपने भीतर एक पिया।
भीतर का सारा अंधियारा भाग जायेगा क्षण में,
रखने को रख ही देते हैं अपने भीतर एक दिया।
जीवन जीते वन वानर संग घोर संकटों में जीवन,
खोजें वन कानन में रहते अपने भीतर एक सिया।
साथ जिये थे जीते जाते जीवन का प्रारब्ध समझ,
शायद ही पलने देते हैं अपने भीतर एक रिया।
जाने कैसी – कैसी बातें हरदम चलती रहती हैं,
नहीं कभी रखने देते हैं अपने भीतर एक हिया।
सफर बड़ा लम्बा दिखता रेतीले पद चापो बिन,
उनको ही पाने देते हैं अपने भीतर एक ठिया।

वाई.वेद प्रकाश
द्वारा विद्या रमण फाउंडेशन
शंकर नगर, मुराई बाग, डलमऊ, रायबरेली उत्तर प्रदेश 229207
9670040890

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