साहित्य

नव संवत्सर का स्वागत

राजलक्ष्मी श्रीवास्तव

नव प्रभात की पहली किरण, आशा का संदेश लाई,
नव संवत्सर की मधुर बेला, खुशियों की सौगात लाई।
पवन में बसी नई उमंग, मन में नव उल्लास,
हर दिशा में गूंज रहा है, नव वर्ष का मधुमास।
सूनी राहों पर फिर से, सपनों के फूल खिले,
बीते दुख के सारे बादल, धीरे-धीरे अब छंटे।
धरती ने ओढ़ी हरियाली, अम्बर ने रंग सजाए,
प्रकृति भी हर्षित होकर, नव गीत सुनाए।
पुरानी यादों को देकर, मीठी-सी विदाई,
नए सपनों की डगर पर, फिर से चलने की बधाई।
हर मन में जागे विश्वास, हर हृदय में हो उजास,
नव संवत्सर लाए संग, सुख-समृद्धि का प्रकाश।
रिश्तों में घुल जाए मधुरता, प्रेम का रंग गहरा हो,
हर जीवन में खुशियों का सुंदर सवेरा हो।
संघर्षों से सीख लेकर, आगे बढ़ते जाना,
हर पल को अपने साहस से, सफल बनाते जाना।
नव संवत्सर का यह पर्व, देता यही संदेश,
सकारात्मक सोच से ही, जीवन बने विशेष।
आओ मिलकर करें प्रण, हर दिन कुछ नया करेंगे,
नव संवत्सर के संग हम, सपनों को साकार करेंगे।

राजलक्ष्मी श्रीवास्तव
जगदलपुर राजिम
छत्तीसगढ़

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