साहित्य

रिमझिम सी कोई बात लिखों

शिवा सिहंल

कभी खुशी कभी गम के अफसाने लिखो,
मन मे दबे प्यार के कुछ फंसाने लिखो।

कुछ गिले-शिकवे को शब्दों में सहेज के लिखो,
बिछड़ा यार मिल जाए कुछ ऐसी तड़प लिखो ।

कलम से जुड़ी धड़कनों की आवाज लिखो,
पढ़ने वालों का दिल दहल जाए ऐसी आगाज लिखो ।

बिखरे अरमानों को मोतियों मैं गूंथ कर लिखों
तन्हाई और जख्मी आंहो को कवि की कल्पना में लिखो ।

आज जो दिल में आएं वो मस्ती के नज़राने लिखो,
चाहों तो प्यारी रसभरी कुछ पंक्ति कविता की लिखों।

कुछ यारों की खट्टी मीठी यादगार लिखो,
बचपन तो कुछ जवानी की शैतानियां लिखो।

इंतजार,प्यार, दीदार वो मुस्कान के जाम लिखो,
रिमझिम बरसती सावन की मीठी फुहार लिखो ।

यारों का यार है वो बड़ा दिलदार दिलो जान से करता प्यार है,
जिसे पढ़के हंसी आए प्यार का ऐसा मीठा पैगाम लिखो ।

कहे राज यूं हमसे मेरी छतरी के नीचे आजा पगली,
दिल मेरा डुबे क्यों रिमझिम भीगे शिवा एकली ।
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शिवा सिहंल आबुरोड

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