
माँ अंबिके पधारो, झांकी सुघर सजाऊँ।
शुभ धूप दीप देकर, वंदन करूँ मनाऊँ॥
सेवा करूँ सदा अब, श्रद्धा सदा दिखाऊँ।
पूजा करूँ तुम्हारी, माँ आरती सुनाऊँ॥
माँ अंबिके भवानी, निश दिन तुम्हेँ पुकारूँ।
नित ध्यान मग्न होकर, अब आरती उतारूँ॥
स्वीकार अब करो माँ, वंदन करूँ तुम्हारा।
तुम पास अब बुला लो, चंदन करूँ तुम्हारा॥
माता तुम्हीं हो जग की, तू मात है भवानी।
रक्षा करो हमारी, जगदम्बिका सयानी॥
जपता रहूँ तुम्हें मैं, माँ शारदे सुहानी।
तुम को सदा पुकारूँ, जपता रहूँ बखानी॥
© डॉ॰ अर्जुन गुप्ता ‘गुंजन’
प्रयागराज, उत्तर प्रदेश




