साहित्य

पर्यावरणीय उड़ान

निलम अग्रवाल 'दीक्षिता'

धरती फैलाओ हरियाली,
चले हवा अनुपम मतवाली।
बंद करो संसाधन दोहन,
करो प्रदूषण मानव योजन ।।

पंछी की है साँसे घुटती,
उनकी जीवन नैया बुझती।।
पानी गंदा क्यों हो करते,
पशु -पक्षी छूने से डरते ।।

हुई विषैली देख हवाएँ,
पेड़ बिचारे मुरझा जाएँ।
मानव यह संकल्प उठाओ,
वसुंधरा खुशहाल बनाओ।।

दिया ईश ने जीवन प्यारा,
अविरल अनुपम न्यारा- न्यारा।
देखभाल है हमको करना,
पूरा करना सुंदर सपना।।

मधुरम दिखता बहता झरना,
पर्वत दिखे हमारा गहना ।
देखो इसकी शान निराली,
फूल खिले हैं डाली- डाली।।

आज इसे संजोना होगा,
जागो मानव बनो दरोगा।
आज विरासत बढ़ती जाती,
यह उड़ान ही हमें डुबाती।।

निलम अग्रवाल दीक्षिता’

भुवनेश्वर (ओड़िशा)
9437463838

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