साहित्य

होंसले को सदैव रखना

रिया राणावत

होंसले को सदैव रखना।।
होंसले को सदैव रखना।।
खोना नहीं निराशाओं में कहीं,
अपने मन में एक जुनून रखना।
तुम चाहो तो कर सकते हो ,
इतना ही विश्वास है रखना ।
उम्मीदों पर खड़ी उतरना ,
उज्ज्वल भविष्य अपना रखना ।
ना कोई डराएगा ,
ना किसी का डर रखना ।
रस्ते चाहे कठिन हो कितने ,
तुम सिर्फ हिम्मत रखना ।
डर जाओ ,
तो साथ एक वचन रखना।
उड़ाने के बीच ,
कभी कोई विघ्न ना रखना।
कोशिश इतनी करना,
गलती का कोई मौका ना रखना।
दरवाज़े हो सबके,
तू एक दरवाजा याद रखना ।
चाहे मज़्ज़ित हो , या गुरुद्वारे , या मंदिर हो , या चर्च,
तू अपनी मंजिल एक रखना ।
विघ्नों से भाग के ,
तू आप पेरो कुल्हाड़ी मत रखना।
हौसलों से एक बार ,
अपनी मंजिल को छू कर रखना।
राहे चाहे कठिन हो ,
तू दिल में सिर्फ हिम्मत रखना ।
आंसुओं से डर कर तू ,
अगली गलती फिर मत रखना ।
ईरादे नेक और मन स्वच्छ,
जीवन में एक निर्णय तय रखना।।
होंसले को सदैव रखना।।
होंसले को सदैव रखना।।

– रिया राणावत
कालोदेवी,झाबुआ(मध्यप्रदेश)

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