
आओ मिलकर विश्व पुस्तक दिवस मनाएं,
सारी सृष्टि में हम पुस्तकों का मान बढ़ाएं।
शब्द रूपी दीपक अज्ञान पल भर में हर लेते हैं,
ज्ञान की गंगा रूपी अक्षर मन को निर्मल कर देते हैं।
पुस्तक के हर पन्ने में छुपा होता है ज्ञान का भंडार,
पुस्तक जिसकी साथी हो उसकी नैया हो जाती पार।
पुस्तक हमारी सच्ची साथी हर पल साथ निभाती है,
बाहर की दुनिया में शोर है पर यह भीतर से सुकून सिखाती है।
हमारी हर समस्या का पुस्तके कर देती है समाधान,
जो इनके संग चले दुनिया में बढ़ता है हर पल उसका मान।
आओ आज मिलकर हम प्रण करें इनसे नाता नहीं तोड़ेंगे,
ज्ञान रूपी इस धरोहर को संभाल कर जीवन में आगे बढ़ेंगे।
अच्छी पुस्तकें की हमें जीवन में कभी अकेला होने नहीं देती,
जीवन में कितनी भी कठिनाइयां आए यह हमें हार मानने नहीं देती।
जिनके जीवन में हमेशा होता है अच्छी पुस्तकों का साया,
उनके जीवन को आगे बढ़ने से रोक नहीं पाती मोह और माया।
सौ, भावना मोहन विधानी ✍️
अमरावती महाराष्ट्र।




