स्वच्छ भारत अभियान : नायाब संग्रह

श्यामल बिहारी महतो हिन्दी साहित्य जगत के एक सुपरिचित और महत्वपूर्ण हस्ताक्षर हैं। “स्वच्छ भारत अभियान ” महतो जी का छठां कहानी संग्रह है। इसी बीच उन्होंने ‘कोयला का फूल ‘ नामक उपन्यास भी लिखा है।

महतो जी झारखंड के निवासी हैं और उनकी कहानियां खुरदुरी जमीन पर उग आए आंचलिक परिवेश में जीवन और समाज के विष-बेलों का उत्खनन करती हैं और रूढ़ियों एवं अत्याधुनिकता से लिपटे हुए सामाजिक ताने-बाने से हमें परिचित कराती है,साथ ही विषमताओं पर बेलौस अंदाज में सम्यक् प्रहार भी करती हैं।
अपनी पहली कहानी में ही महतो जी ने कोरोना काल के विषम परिस्थितियों में एक विघटन की तरफ अग्रसर परिवार के अन्तर्द्वन्द्व का संवेदनीय चित्रण किया है एवं परिवार का पुनर्मिलन करा कर सुखद संदेश दिया है ,साथ ही साथ पुलिस वालों का सार्थक पहल भी जो देखने में कम ही मिलता है। कुल मिलाकर “रिश्तों का मोल” एक उत्कृष्ट रचना है।
दूसरी कहानी “लाकडाउन जिंदगी ” कोरोना काल के जीवन के संग संग रिश्तों की त्रासदी को भी दर्शाती है और सार्थक संदेश के साथ समाप्त होती है।
“आश्रम वाले नेता ” वर्तमान राजनीतिक परिपेक्ष्य की सचबयानी है। “जीवन की कसौटी ” व्यक्ति के अकर्मण्यता को दर्शाती है। व्यक्ति बिना कार्य किये ही धन की लिप्सा रखता है। “नेता जी कहाँ हैं ” एक इमानदार नेता पर केन्द्रित है। आज कल ऐसे नेता दुर्लभ हैं।”बस अब और नहीं ” कहानी में सामाजिक उच्छृंखलता करने वाले मनचले पर कोर्ट का अनोखा और सार्थक फैसला है। “वहू भात” कहानी बदलते समय के संग सामाजिक बदलाव की सूचक है। कहानी “सास की पाठशाला ” यदि रूढ़िवादी परिपाटी का प्रतिरोध करती है तो साथ ही आधुनिकता में लिपटे जीवन मूल्यों के अधःपतन को भी दर्शाती है।
“विश्वासघाती” कहानी आज के राजनीतिक परिदृश्य का वृत्तचित्र है।राजनीति में आदर्श तो खुर्दबीन से भी ढूंढने पर भी अप्राप्य है। “रिटर्न गिफ्ट” इस संग्रह के उत्कृष्ट कहानियों में एक है। जंगलों का कटना एक गंभीर समस्या है जो जन-जीवन को गहराई तक प्रभावित करता है। कहानीकार ने इस महत्वपूर्ण समस्या को शिद्दत से उठाया है। हमारे पर्यावरण के लिए जंगल और बगीचे तो अत्यंत आवश्यक है। कहानी संग्रह की शीर्षक कहानी बहुद्देशीय और सार्थक समाधान प्रस्तुत करती है।” वीर और बंटी” एवं “इश्क का बुखार ” यह संदेश देने में सफल है कि हमें घर के अन्य सदस्यों की तरह पालतू पशु से प्रेम करना चाहिए और उनके संरक्षण पर ध्यान देना चाहिए।
इस कहानी संग्रह की शीर्षक कहानी “स्वच्छ भारत अभियान” के मुख्य पात्र राजू सिंह और लाजवंती हैं। दोनों की शादी होना एक सुखद सामाजिक संकेत है, पर यह प्रेमपाल घासी और उसके समर्थको के सामाजिक दबाव में ही संभव हो सका। यह कहानी वर्ण चेतना के विरोधाभास को उजागर करती है।
महतो जी के इस संग्रह में कुल तेरह कहानियाँ हैं।
इनके पात्र हमारे आस-पास ही उपस्थित हैं,वह ढूंढने पर कहीं भी दृष्टिगोचर हो सकते हैं। कहानियाँ कोरोना काल के कठिनाइयों के संग जुड़े मनोविज्ञान पर सृजित हैं एवं समाज को उत्तम संदेश देने में सफल हैं।
श्यामल बिहारी महतो जी को इस अत्योत्तम संग्रह के लिए आत्मीय धन्यवाद और साधुवाद।
रविशंकर शुक्ल
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