साहित्य

हाँ, मैं मजदूर हूँ

जयचन्द प्रजापति 'जय'

इस दुनिया में
जो भी अजूबा बनाया गया है
वह मजदूरों की देन है
उसकी कारीगरी है
उसकी मेहनत है

सूखी रोटियां खाकर
राजमहल बनाया है
ताकि महारानी आराम से
सुख की चैन से सो सके

ताजमहल बनाया
खूबसूरत बाग लगाया
अपने पसीने बहाकर
गगनचुम्बी इमारतें
इसी मजदूर ने बनाया

टूटी झोपड़ी में रहकर
दुनिया के लिए
सुकून का घर बनाया

यही मजदूर ही है
जिसने सारी दुनिया को
रंगीन बनाया है
अपनी शोहरत को
छिपाकर

आज तक किसी इमारत में
मजदूर का नाम नहीं लिखा है
फिर भी वह मजदूर
गर्व से कहता है
हाँ, मैं मजदूर हूँ।

———
जयचन्द प्रजापति ‘जय’
प्रयागराज

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