साहित्य

नमन-मंच 

स्वरचित रचना

नमन-मंच

जय माँ वीणावादिनी

आराधिका साहित्यिक मंच

इस्लामपुर पश्चिम बंगाल

चतुर्दश सप्ताह साप्ताहिक लेखन आयोजन

दिनांक:- 4.6.2026

वार:-गुरुवार

विषय:- प्लास्टिक का विसर्जन

विधा:- कविता

 

प्लास्टिक का अति प्रयोग, लील हमे जायेगा, दीमक की मानिंद प्रकृति को यह चट कर जायेगा।

अपने सुख की परिभाषा में सृष्टि शब्द भी जोड़े, पोलीथिन की अतिशयता को इस दम से ही छोड़े।

 

साधन की जिद हम पर ही भारी पड़ जाएगी,वर्तमान की नादानी कल संतति डस जाएगी, पंचतत्व से सृष्टि बनी है, उसमे ही मिट जाती है,केवल पोलीथिन ही हैजो कभी नही समाती है।

 

नदियों मे कभी नही गलती, जल को दूषित कर देती है,मिट्टी मे भी कभी नही मिलती, धरा बंजर कर देती है, प्लास्टिक सृष्टि के क्रम को छिन्न- भिन्न करती है,विषकन्या की तरह प्रकृति को जहरीला करती है।

 

फल- सब्जी के छिलकों में ना फेंके पोलीथिन, पर्यावरण को कभी करे ना प्लास्टिक से मलिन, गाय,भैस,हो या बकरी जब छिलके खाती है,पॉलीथिन कि थैली भी संग निगल जाती है।

 

सोने, चांदी के समान ही पशु कि कीमत जानो,इनका भी अस्तित्व जरूरी है, मनुज तनिक पहचानो, यत्र तंत्र सर्वत्र लगे है,प्लास्टिक के अंबार, दूर करे जीवन शैली से करे इसे स्वीकार।

 

स्वरचित रचना

संगीता वर्मा

कान्पुर उत्तर प्रदेश

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