
रमन अपने पिता से दुखी है। अब उसके पिता अस्सी के पार हो गयें हैं। पिता की देखभाल करने में कठिनाई आ रही है। बुजुर्ग पिता से कभी ठीक से बात नहीं करता। कोई चीज मांगते तो रमन तथा उसकी पत्नी ठीक से उनकी बात नहीं सुनते। उनके बुजुर्गियत का तान मारते।
किसी चीज की फरमाइश मत किया करिये पापा। हम लोगों के पास इतना समय नहीं है कि आपकी हर बात सुनें। घर के खर्चे इतने हैं कि पूरा नहीं हो पा रहा है। आपकी दवा भी खरीदना मुश्किल होता है। किसी तरह से दवा ले आता हूँ। कर्जे में हूँ।
बुजुर्ग पिता की औकात अब जीरो नजर आ रही है। पिता को रमन एक बोझ की तरह समझ रहा है। ईश्वर से प्रार्थना करता रहता है कि भगवन जल्दी पिता को उठा ले जाये ताकि हम अपने परिवार के साथ सुखमय जीवन जी सके। इनके वजह से हमारा जीवन एक बोझ जैसा है।
रमन यह चीज मानता है कि भले समाज में एक हैसियत रही हो लेकिन आज समाज एकदम दूर हो गया है। समाज के लिए भले ही अपना जीवन न्यौछावर करते रहे। आधा हिस्सा भले लोगों की मदद करने में खर्च कर देते थे लेकिन इनका बनाया समाज मेरे किसी काम का नहीं।
एकदिन रमन अपनी कार से आ रहे थे। अचानक उनकी कार से एक व्यक्ति की बकरी दब कर मर गयी। गुस्साये लोगों ने रमन के उपर हमला कर दिया। अचानक कुछ लोग पहचान गये कि ये तो चौधरी साहब के लड़के हैं। चौधरी साहब के लड़के जानकर लोग खुद शांत हो गये और अपनी ही गलती मानने लगे कि हम लोगो ने आपको भला बुरा कहा।
आपके पिताजी आज भी हम लोगो के दिल में रहते हैं। अब भले बुजुर्ग हो गयें है लेकिन उनके द्वारा किया गया सामाजिक कार्य को हम लोग भूल नहीं सकते। आज आप अपने पिता के व्यवहार की ताकत की वजह से बच गये। आज रमन को अपने पिता होने का एहसास हुआ। उसकी आंखें खुल गयी।
जिस बुजुर्ग पिता का मैं अपमान करता रहा आज उस बुजुर्ग पिता के बनाये व्यवहार की वजह से बच गया। रमन पिता से माफी मांगा और उस दिन से बुजुर्ग पिता की सेवा में लग गया।
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जयचन्द प्रजापति ‘जय’
प्रयागराज




