साहित्य

साफ नियत नियम से चलो मिलता ईनाम बहुत है।

कपूर"श्री हंस

नियम से चलो तो आराम बहुत है।

ईमानदारी का अपना ही ईनाम बहुत है।।

शिष्टाचार को बनाओ जीवन का अंग।

अभी तुम थको नहीं कि काम बहुत है।।

2

हर किसीको दुयाएं तो मिले सलाम बहुत है।

नियत रखो साफ जरूरी ईमान बहुत है।।

काट लो हर नफरत की डोर जरूर तुम।

प्रेम बसी हर खुशी का जहान बहुत है।।

3

न नष्ट करो समय इसका सम्मान बहुत है।

समय का करा अनादर तो नुकसान बहुत है।।

समय से सीखो कि है ये बहुत बड़ा शिक्षक।

समय से करो हरकाम तो मान बहुत है।।

4

हर संबंध में जरूरी आपसी एतराम बहुत है।

निरंतर प्रयास पूरे करने कोअरमान बहुत है।।

यह छोटी सी जिंदगी प्यार के लिए भी कम।

कर के देखो सब कि यह आसान बहुत है।।

5

धोखेबाज नहीं परवाज हो कि उड़ान बहुत है।

कोशिश की मंजिल का भी आसमान बहुत है।।

सेवा और आदर करो बहुत माता- पिता का।

उतार नहीं सकते उनका एहसान बहुत है।।

6

जरूरी नहीं भगवान बनो कि इंसान बहुत है।

न करो गलत काम प्रभु का फरमान बहुत है।।

बस कमाओ दुनिया में आकर नेक नाम ही।

प्रभु दिया अनमोल जीवन जो वरदान बहुत है।।

*रचयिता।।एस के कपूर”श्री हंस”*

*बरेली।।*

*©. @. skkapoor*

*सर्वाधिकार सुरक्षित*

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