साहित्य

निजी जीवन पर दस्तक देता यह सत्य 

डॉ रामशंकर चंचल

मध्य प्रदेश के अद्भुत साहित्य साधक डॉ रामशंकर चंचल जो आज देश और दुनिया में सबसे ज्यादा लोकप्रिय है उनके निजी जीवन को जान कर आप चौक सकते हैं

सालों से किसी भी व्यक्ति से फ़ोन नहीं करते हैं न कोई बात करते हैं

सारी जिंदगी काटन टीशर्ट और जीन्स को पहने उन्हें देख सकते हैं फिर अवसर उनके सम्मान का हो

शादी हो या कितने ही बड़ा आयोजन बड़े व्यक्ति से मिलना हो

बस इसी कपड़ों में नजर आते है

सालों से कोई नया वस्त्र नहीं खरीदा, बेटे या बहू लाते हैं मन हुआ तो स्वीकार करना नहीं तो साफ़ मना कर देना

सालों से किसी आयोजन में नजर नहीं आए यह अद्भुत हस्ति कभी कभी ही शहर से दूर किसी खास अपने के आमंत्रित करने पर दस्तक देते हैं वो भी उन्हें सुना जाता है सम्मान से और उनका अथाह प्यार और प्रेम होने से या हिंदी के महत्व की बात हो

सालों से प्रतिदिन जाग कर साहित्य

साधना में व्यस्त और मस्त है कोई सम्मान मान चाह नहीं साफ़ मना कर देते हैं

करीब बीस साल से गृहस्थ जीवन होते हुए भी संन्यासी जीवन जी रहे डॉ रामशंकर चंचल को अपने इस ईश्वरीय आशीष कर्म पर गर्व है

एकदम सादा खाना दो रोटी चावल दाल सुबह और यह कुछ शाम को

प्रतिदिन आठ दस किलो मीटर पैदल चलते हैं इससे ज्यादा संभव है पर कम नहीं

पैसा है कोई कमी नहीं पर संन्यासी जीवन में अपनी फ़क़ीरी मैं मस्त है और उसी को सुख सुकून महसूस करते हैं

खुद की लाखों की कार है सालों से कभी किसी ने उन्हें उसमें बैठे नहीं देखा होगा, झाबुआ छोड़ कर बाहर कहीं गए सालों हो गए यहां तक की अपने ही शहर में साल में तीन चार बार कुछ खास मीडिया मित्र से मिलने जाते है या कभी बहुत नितांत जरूरी हो तब घर से निकलते है

 

घर आए अतिथि का सम्मान और आदर कोई उनसे सीखे पूरा सम्मान देते हैं सदा ही उसे ईश्वर आशीष मान आदर करते हुए

 

यह है एकदम सहज सरल और अपनी फ़क़ीरी मैं मस्त डॉ रामशंकर चंचल जिसकी सादगी के लाखों लोग चाहने वाले हैं यह अद्भुत सत्य किसी से अनजान नहीं है

देश और दुनिया में सोशल मीडिया में दस्तक देता राज करता डॉ रामशंकर चंचल को धर्म और राजनीति से कोई लेना देना नहीं

सदा ही सभी मानव मात्र फिर किसी भी उम्र के हो सत् सत् वंदन करते प्रणाम करते हुए जीते है मस्त

उनके जीवन का मूल मंत्र मानवता जिंदा रहे और दुनिया सुकून महसूस करें हर इंसान को दो वक्त का भर पेट खाना तन पर कपड़ा और रहने को आवास हो प्राणी मात्र पशु पक्षी को प्यार करता यह साधारण व्यक्ति आज एक अद्भुत मुकाम पर चर्चा बना हुआ सभी के लिए चौकने वाला सत्य है

जिसकी सोशल मीडिया पर देश और दुनिया के हजारों हजारों हस्तियां मित्र हैं फिर वो किसी भी कला से जुड़ी हो और यह सब कुछ डॉ रामशंकर चंचल ने अथक परिश्रम साधना और तपस्या से हासिल किया उनका अद्भुत नाम और झाबुआ मध्य प्रदेश आदिवासी जिले की विश्व धरा पर चर्चा है

उम्र के 67साल में दस्तक देते डॉ रामशंकर चंचल के हजारों हजारों हस्तियां के साथ युवा पीढ़ी की प्रतिभा हैं जो उनका सम्मान और आदर करती हैं

जितना लिखा जाय कम होगा इस सादगी लिए चौकने वाला सत्य लिए डॉ रामशंकर चंचल की विश्व धरा पर छाई अद्भुत पहचान के बारे में

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