साहित्य

पुरुषोत्म मास की महिमा

डाॅ सुमन मेहरोत्रा

जब समय की धारा डोले, गणना जब उलझ जाए,

सौर-चंद्र के अंतर से, एक नया मास आ जाए।

 

जिसे जग ने ठुकराया था, अशुभ कह दूर किया,

विष्णु चरणों में पहुँच, उसने अपना मान लिया।

 

पुरुषोत्तम नाम मिला जब, भाग्य सितारा चमका,

हरि ने अपने हृदय लगाया, जीवन उसका दमका।

 

अब यह मास महान बना, सबसे पावन माना,

भक्ति, दान, जप-तप से, हर जन ने इसे पहचाना।

 

जो भी श्रद्धा से इसमें, हरि का ध्यान लगाता,

पापों के तम को हरकर, जीवन सुधा पाता।

 

तुलसी दल अर्पण कर, जो नाम हरि का गाता,

कष्टों का हर बंधन फिर, स्वतः ही कट जाता।

 

नहीं अशुभ अब यह मास, यह तो वरदान बना है,

हरि कृपा का साक्षात् यह अनुपम विधान बना है।

 

पुरुषोत्तम की महिमा, अनंत अपरम्पार,

भक्ति से जो जुड़ जाए, उसका जीवन साकार।

 

स्वरचित

डाॅ सुमन मेहरोत्रा’ सुरभि’

मुजफ्फरपुर, बिहार

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