साहित्य

पंक्ति आधारित 

_संगीता श्रीवास्तव

क्या लाया था जो रोता है,

क्या जाएगा साथ जी।

हानिलाभ जीवन मरण,

यश अपयश विधि हाथ जी.

 

बचपन बीता खेल कूद में

यौवन हसते गाते..

आया बुढापा ठौर बदल गई,

छूटे संगी साथी।

आयेगा वो क्रूर समय भी,

जलेगी माटी गात जी,

क्या लाया था जो रोता है,

क्या जाएगा साथ जी।

 

कौडी-कौडी जोड रहा था,,

आया कितना काम‌।

तृष्णा की गगरी नहि भरती…

दौडे उम्र तमाम।

तन घट एक दिन फूट गया तो,

न आएगा कुछ भी हाथ जी.

क्या लाया था जो रोता है,

क्या जाएगा साथ जी।

 

हरि भजने का समय बिताया,

ताड़ी जुए खजाने में.

ताकत क्षीण हुई फिर भी रखते

चाबी दबा सिरहाने में।

क्या एक पल भी रामनाम की,

चर्चा भी किए साथ जी।

क्या लाया था जो रोता है,

क्या जाएगा साथ जी।

 

भूल गया तू किसने तुझको,

किसलिए जन्म दिया है।

ईश्वर से संबंध शाश्वत

आखिर तेरा क्या है।

मिथ्या विषय विकारों में तुम तो,

उलझे रहे दिन रात जी।

क्या लाया था जो रोता है,

क्या जाएगा साथ जी।

 

_संगीता श्रीवास्तव ‘शिवपुरी ‘

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button
error: Content is protected !!