साहित्य

लो हो गया गोल (बाल कविता)

कार्तिकेय त्रिपाठी

आ गया फुटबॉल का मौसम,

गली-गली में शोर हो रहा,

भागा,आया,मारी ठोकर,

और हो गया गोल।

आ गया फुटबॉल …

कोई दे रहा पास यहां पर,

कोई सिर से करता गोल,

तनिक चूक हो जाती है तो,

पल में हो जाता है गोल।

आ गया फुटबॉल ….

यूं तो गोल नहीं भाता है,

पर मैदानों में जो करता गोल,

खूब तालियां पाता है वह,

और बजवाता ढोल।

आ गया फुटबॉल …

गोली जब खाता है गोल,

आंखें करता गोल-मटोल,

यही तिलस्म है इस खेल का,

और सारा है भूगोल।

आ गया फुटबॉल …

“””””””””””””

कार्तिकेय त्रिपाठी ‘श्रीतिक’

गांधीनगर इन्दौर

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