
छोड़ने से पहले ही
कितने समय तक
प्रतिदिन इसी बात को
लेकर तुम कितनी
परेशान थी
प्रतिदिन दिन
देखो मैं जा रही हूं
तुम्हें छोड़ कर
कुछ संज में आ रहा कि नहीं
घर से बाहर निकलो
मिलो सभी से, आदि आदि
सैकड़ों राय देती
मैं चुपचाप सुनता था
सोचता तुम सचमुच
बेहद प्यार करती हो
कितनी चिंता है तुम्हें
अभी से , कितनी मजबूरी है
तुम्हारी यह सब कुछ
तुम्हारी इन बातों के
अद्भुत मार्मिक शब्दों में
अथाह प्यार लिए था
सच तो यह कि
यह सब सुन
में परेशान था
तुम कैसे छोड़ जा रही
कैसे जी पाओगी
जियोगी या तिल तिल
रोज़ ख़ुद को,,
इससे आगे सोचने का
कभी साहस नहीं जुटा पाया
जब बार बार तुम्हारा
देखो मैं जा रही
घर से बाहर निकलो
मिलो सब से सुन
एक दिन बहुत ही
गुस्से में आकर बोला था
जाओ,आज जाओ
किसने रोका
मुझे मत बोलो
घर से बाहर निकलो
तुम याद है
उससे ज्यादा गुस्सा करते
बोली, रोना मुझे बैठ कर
में तुम्हें कितना प्यार करता हूं
मुझे कभी भी यह बताने की
जरूरत नहीं लगी
तुम्हारी यह बात कि
मुझे बैठ रोना
सुन कर
सुकून मिलता रहा
बस बहुत था
मेरे लिए यह कि
तुम जानती हो
में तुम्हें कितना प्यार करता हूं
और यही तुम्हें मेरी चिंता
खाए जा रही है
यह इस बात का
प्रमाण था कि
तुम भी बहुत बहुत
प्यार करती हो
हमारे लिए जीने में
इससे ज्यादा अच्छा
सुख सुकून क्या होगा
यही वजह है कि
हम दोनों अलग अलग होकर भी
सदा ही साथ महसूस करते हुए
जीते है मस्त और व्यस्त
सदा ही सक्रिय और
अद्भुत ऊर्जा समेटे
यही सब देख दुनियां चौक
जाती है क्यों कि
यह दुनियां प्यार की
परिभाषा से अज्ञान है
डॉ रामशंकर चंचल
झाबुआ मध्य प्रदेश




