
शब्दों से सृजन होता है, विचारों से परिवर्तन आता है।
साहित्य ही वह दीपक है जो समाज और संस्कृति को उठाता है।
जब कलम स्याही में डूबकर सच लिखती है,
तब सोई हुई आत्माएँ जागती हैं, बुझी हुई मशालें जलती हैं।
गाँव की माटी से लेकर शहर की अट्टालिकाओं तक,
साहित्य ही जोड़ता है दिलों को एक डोर में।
आओ, शब्दों को हथियार बनाएं, लेखनी को तलवार।
नफरत मिटे, प्रेम बहे, यही हो साहित्य का सार।
‘दि ग्राम टुडे’ का संकल्प है — श्रेष्ठ साहित्य, सशक्त समाज।
हम सब मिलकर रचें ऐसा कल, जहाँ हर मन में हो उजियार।
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ममता झा मेधा
डालटेनगंज




