
कृष्णा की प्रिय राधा रानी।
बिन विवाह के भी सम्पूर्ण प्रेम कहानी।
जग की सबसे अमर दोनों की प्रेम कहानी !
प्रेम तुम्हारा अजब अनोखा ।
तुम दोनों ने एक दूजे को तन-मन से चाहा ।
विरह होने पर भी प्रेम न छूटा ।
छोड़ चला गया कान्हा पलट फिर न देखा ।
पर पवित्र पावन प्रेम तुम्हारा ।
कोई किसी भी युग तुम दोनो सा न दिखा ।
हर मंदिर में राधा कृष्ण की मूरत ही दिखा ।
तेरी प्रेम गाथा लिखनें हेतु असमर्थ निवेदिता ।
तेरे नि:स्वार्थ प्रेम की अमिट अद्भूत प्रेम कथा ।
कान्हा की याद में राधा गुजारी सारी जिन्दगी ।
कृष्ण राधा संग रहे भी नहीं ,
राधा पुकारे तो कान्हा भी नजर आते वही ।
आज भी सारी दुनियाँ राधा कृष्णा की प्रेम दिवानी ।
आज भी जिसके नाम से छलक आए आँखों में पानी ।
भक्ति भाव से परिपूर्ण अमर ये निश्छल प्रेम कहानी ।
बिन रस्मों के सात फेरों से बढ़ कर अमिट राधा कृष्ण की अमर प्रेम कहानी ।.
निवेदिता सिन्हा×
गया जी, बिहार




