साहित्य

वीर अभिमन्यु

संगीता वर्मा

वीर अभिमन्यु साहसी

छोटा बालक, सोलह साल,

सुभद्रा का वह लाल कमाल।

पांडवों की थी वह शान,

अर्जुन का बेटा महान!

 

चक्रव्यूह कौरव ने रचा,

पांडवों को उसने फंसाया।

व्यूह तोड़ना कोई न जाने,

अभिमन्यु आगे तब आया।

 

मां की कोख में पाठ पढ़ा था,

व्यूह में घुसना उसको आता।

छह दरवाजे तोड़ गिराए,

दुश्मन का दल थर-थर काँपा।

 

सातवें द्वार पर छल हुआ,

अकेला बालक निहत्था था।

फिर भी उसने हार न मानी,

लड़ी वीरता की कहानी।

 

कट गया पर झुका नहीं वह,

वीर अमर वह कहलाया।

बालक होकर भी दुनिया में,

बड़ा इतिहास रच आया।

 

स्वरचित,मौलिक✍️

संगीता वर्म, कानपुर उत्तर प्रदेश

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