साहित्य

सावन और यादें

सौ, भावना मोहन

खिड़की पर बैठकर मैं,

देख रही हूं पहली बरसात।

वसुंधरा के साथ-साथ,

भीग रही मेरे मन की बात।

 

मिट्टी की भीनी भीनी खुशबू,

कोयल उपवन में चहक रही है।

पेड़ों पर पड़ गए हैं झूले,

हथेलियों पर मेहंदी महक रही है।

 

सावन में कोई याद करे पिया को,

कोई याद करता बाबुल का गांव।

वह बचपन के संगी साथी हमारे,

वह बरगद की ठंडी ठंडी छांव।

 

सावन जब झूम के बरसता है,

वसुंधरा पर हरियाली छा जाती है।

इस मौसम में किसी को याद कर,

आंखों से अश्रु धारा बह जाती है।

 

ठंडी ठंडी हवाएं बहने लगती है,

खेत खलिहान लहराते हैं।

वृक्षों के गहने पहनती वसुंधरा,

किसान भी मुस्कुराने लगते हैं।

 

हम भी सावन जैसे बन जाए,

सब पर प्यार की बरसात करें।

किसी का जीवन दर्द भरा ना हो,

एक नए एहसास की शुरुआत करें।

 

सौ, भावना मोहन विधानी ✍️

अमरावती महाराष्ट्र।

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