साहित्य

रिमझिम -रिमझिम बरखा ने गीत

पार्वती देवी

रिमझिम-रिमझिम बरखा ने आ,मेरा मन हर्षाया

टप-टप गिरती बूँदों ने मिल,जीवन राग सुनाया।

रिमझिम —

हवा डोलती क्या पुरवाई, झूम रही डाली-डाली

सन-सन-सन करके कानों में, है संगीत सुनाया।

रिमझिम —

गड़-गड़-गड़ कर रहे मेघ अब,करते आपस में घर्षण

चपला ने भी चमक-धमक कर,हमको खूब डराया।

रिमझिम —

दादुर बोलें, मोर नाचते, अपने प्रियतम की धुन में

आज पपिहरे ने भी मिलकर, विरही गीत सुनाया ।

रिमझिम —

निशाकाल में इधर-उधर अब,उड़ते हैं फिर से जुगनू

भुक-भुक चमक दिखा जुगनू ने,उजियारा है फैलाया।

रिमझिम —

हरियाली चहु ओर दीखती, धरती ने ओढ़ी चादर

इस हरीतिमा ने’गौरा’ को,समृद्धि की राह दिखाया।

रिमझिम —

***

पार्वती देवी ‘गौरा’ देवरिया

दि.14.07.2026

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