
रिमझिम-रिमझिम बरखा ने आ,मेरा मन हर्षाया
टप-टप गिरती बूँदों ने मिल,जीवन राग सुनाया।
रिमझिम —
हवा डोलती क्या पुरवाई, झूम रही डाली-डाली
सन-सन-सन करके कानों में, है संगीत सुनाया।
रिमझिम —
गड़-गड़-गड़ कर रहे मेघ अब,करते आपस में घर्षण
चपला ने भी चमक-धमक कर,हमको खूब डराया।
रिमझिम —
दादुर बोलें, मोर नाचते, अपने प्रियतम की धुन में
आज पपिहरे ने भी मिलकर, विरही गीत सुनाया ।
रिमझिम —
निशाकाल में इधर-उधर अब,उड़ते हैं फिर से जुगनू
भुक-भुक चमक दिखा जुगनू ने,उजियारा है फैलाया।
रिमझिम —
हरियाली चहु ओर दीखती, धरती ने ओढ़ी चादर
इस हरीतिमा ने’गौरा’ को,समृद्धि की राह दिखाया।
रिमझिम —
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पार्वती देवी ‘गौरा’ देवरिया
दि.14.07.2026




