
गम हमारे सभी तो हवा हो गए।
दर्दे दिल की हमारी दवा हो गए।।
बेख़बर थी ज़माने से मतलब नहीं,
वो तो दिल में बसे बस खुदा हो गए।
मेरी चाहत के किस्से थे मशहूर यूँ,
बातों-बातों में वो क्या से क्या हो गए।
जिनसे हर पल ही उम्मीद करती रही,
वक्त बदला तो वो बेवफ़ा हो गए।
प्यार पाने को जिनका तरसती रही,
करके वादा सनम लापता हो गए।
वो मुहब्बत में ऐसे खफा क्यों हुए,
हाल पूछे नहीं बस दफा हो गए।
जिंदगी इम्तिहाँ ले रही इस कदर,
आज गीता के अरमाँ फ़ना हो गए।
डॉ गीता पांडेय अपराजिता




