
अर्ज सुनो शिव शंकर
मुखड़ा
नाम तुम्हारा जपें निरंतर,
अर्ज सुनो अब हे शिवशंकर।
तीन देव में समझ न अंतर,
नाम सदा शिव का अति सुन्दर।
सावन लेकर आया सुंदर,
बरसे अमृत-धार निरंतर।
बेल-पत्र धर करें अर्चन,
गूँजे महादेव का वंदन।
भक्त पुकारें होकर तत्पर,
दूर करो सब कष्ट प्रभो वर।
नाम तुम्हारा जपें निरंतर,
अर्ज सुनो अब हे शिवशंकर॥
कांवड़ लेकर चले शिवालय,
मुख पर गूँजे शिव दिवालय।
भक्ति-भाव से झुके कलेवर,
पावन हो जीवन का तेवर।
दीन-दुखी के बनो सहायक,
रखना सदा कृपा परिचायक।
नाम तुम्हारा जपें निरंतर,
अर्ज सुनो अब हे शिवशंकर॥
स्वरचित
डाॅ सुमन मेहरोत्रा ‘सुरभि’
मुजफ्फरपुर, बिहार




