
इश्क़ कि हर पुकार में
सिर्फ तू सुनाई देता है
तेरे ना होने पर भी
तू ही दिखाई देता है
शायद तू ना होके भी
मुझे नज़र आता हैं
मेरी इस पुकार में
सिर्फ तेरा नाम सुनाई आता हैं
इश्क़ कि पुकार है
तेरे समझ के बाहर है
तू क्या जाने मेरा इश्क़
तू क्या जाने मेरा इश्क़
मेरा सुकून
सिर्फ तू है
सिर्फ़ तू है
ओर ये इश्क़ कि पुकार है
मेरे दिल का ख्याल है
तेरे से दूर
पर तेरे ही साथ है
इश्क़ कि पुकार को
तू नहीं दबा सकता
मेरा इश्क़
तू नहीं मिटा सकता
इश्क़ कि पुकार है
तेरे समझ के बाहर है।।
रिया राणावत
कलीदेवी, झाबुआ( मध्यप्रदेश)




