
ऊँचे पर्वत, ठंडी हवा,
दुश्मन ने थी चाल चली।
तिरंगा लहराने को वहाँ,
वीर जवानों की टोली चली।
बर्फ ढकी उन चोटियों पर,
गोलियों की बौछार थी।
पीछे हटना ना जाना उन्होंने,
भारत माँ की पुकार थी।
लड़े वो ऐसे सरहद पर,
दुश्मन भी थर्राया था।
लहू बहाकर अपना मिट्टी में,
जीत का परचम लहराया था।
नमन है उन वीरों को,
जो अमर बलिदान दे गए।
कारगिल की उस गाथा को,
इतिहास में नाम कर गए।
स्वरचित
संगीता वर्मा
कानपुर उत्तर प्रदेश


