साहित्य

नन्दलाल मणि त्रिपाठी त्रिपाठी पीताम्बर, गोरखपुर_

नाम है आजाद

आजाद मात्र शब्द नहीं,

आजाद अक्षर संयोग नहीं।

आजाद स्वर का संगीत नहीं,

आजाद केवल विचार नहीं!!

 

आजाद पराक्रम की प्रतिज्ञा,

आजाद विकल्पहीन संकल्प।

आ – आक्रमक अहं, स्व-शाश्वत,

जा – जाग्रत जीव, परतंत्रता पर प्रहार!!

 

जन्म और संकल्प-

यज्ञ-अनुष्ठान स्वतंत्रता का,

संस्कार बना उत्तर प्रदेश।

भाबरा की धरती, मध्य प्रदेश,

तेईस जुलाई, छः सौ छः में जन्म विशेष॥

 

पंद्रह वर्ष की अल्प आयु में,

असहयोग का बिगुल बजाया।

भारत की आजादी का,

पहला सोपान बन के आया॥

 

*नामकरण*

न्यायाधीश ने पूछा नाम,

गर्व से बोले “आजाद”।

पिता का नाम “स्वतंत्रता”,

घर बताया “जेलखाना आजाद”॥

 

अब सुनो अर्थ ‘आजाद’ का,

द – देव पुरुष दुलारा माँ का, मातृभूमि का लाल, संघर्ष की ज्वाला, मशाल ॥

 

*क्रांति*

काकोरी काण्ड की हुंकार थी,

गोरों का तंत्र काँप गया।

HRA और HSRA बनाकर,

भगत, राजगुरु संग शंखनाद!!

 

फरवरी इकतीस, प्रयागराज,

अल्फ्रेड पार्क गवाह बना।

गोली अंतिम खुद को मारी,

पर सीना तान के “आजाद”!!

 

समापन

चंद्रशेखर नाम अमर है,

स्वतंत्रता का प्रमाण है।

आजाद का हर रक्त-कण,

भारत के स्वाभिमान है॥

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