साहित्य

समानान्तर

चन्द्रगुप्त प्रसाद

बबलू क पापा अउर उनकर पूरा परिवार जब वैष्नों देवी,मथुरा वृन्दावन सहित कुछ दुसरहू छोट मोट थाम क दर्शन करत पुण्य बटोरत, गोरखपुर वापस अइलं तब थोडा़ बहुत ठहर, विश्राम कइले के बाद,उनकर मलकिन टोला मुहल्ला,भाई पटेदार के भेजे बदे बहुत हौसला से प्रसाद अलग अलग पैकेट में सहेजे लगलिन। ओमन प्रसाद क एक पैकेट थोड़ बड़हन अउर सबसे अलग थलक देखि के बबलू क पापा पूछ पड़लं कि इ केकरा खातिर निकारल बा ? मलकिन कहलिन कि इ राउर के खासदोस्त बसन्तपुर वाले सुधीरबाबू के घरे भेजाई,बकि इहो हमके तनि छुछुवावन लगत बा,बड़अदमी क घर ह,आप बजारे से कउनो मौसमी फल किलो आधा किलो अउर कीन के,झोला में धइके तब देहल जाइ।

भाभी प्रणाम,सुधीर बाबू कहाँ बाटँ?,कहीं निकरल बाटंय का ? इ लेई बाँके बिहारी लाल जी क प्रसाद ग्रहण करीं,उनके धाम क दर्शन, परिक्रमा करे क सौभाग्य जुट गइल।परम दोस्त क मलकिन थोडा़ प्रसाद निकार काढ़ के माथे श्रद्धा से लगा के अउर तथाकथित प्रेम प्रदर्शन के साथे रख लेहलिन,बाकी अउर सगरो प्रसाद इ कहके वापस सहेज देहलिन कि दुई परानी के बीचे इ ढेर कुला के खाई?उनहूँ के सूगर बढ़ल बा,मीठा नुकसान करी।ऐके एहर ओहर कइला से नीक बा कि ऐके घरे खातिर सहेज लेईं। प्रसाद क निरादर नाहीं होवे के चाहीं त थोडा़ माथे चढा़ लेहलीं।( *अपरंच,उनके कउनों वंशकरन त नाहीं,बकि घर में नौकरन क पूरा फौज भी रहल,ओही हिसाब से प्रसादो धइल रहल।)

बबलू क पापा स्तब्ध रह गइलंन कि घरे जाके अपने मलकिन से का कहब ? का समझाइब !!!

✍️चन्द्रगुप्त प्रसाद वर्मा “अकिंचन”,गोरखपुर

📞चलभाष-९३०५९८८२५२

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